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हीटवेव का आंखों पर असर: ड्राई आई, जलन और UV किरणों से बढ़ता खतरा, जानें सावधानी की सलाह

Gulabi Jagat
28 May 2026 4:51 PM IST
हीटवेव का आंखों पर असर: ड्राई आई, जलन और UV किरणों से बढ़ता खतरा, जानें सावधानी की सलाह
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UV किरणों से बढ़ता खतरा

New Delhi: नई दिल्ली में बढ़ती गर्मी और हीटवेव का असर अब केवल शरीर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका सीधा प्रभाव आंखों पर भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों से जुड़ी कई समस्याएं बढ़ सकती हैं, जिनमें ड्राई आई, जलन, रेडनेस, एलर्जी और धुंधला दिखना प्रमुख हैं।

अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में आंखों की प्राकृतिक नमी तेजी से कम हो जाती है, जिससे कॉर्निया पर असर पड़ता है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि इस दौरान आंखों की देखभाल बेहद जरूरी है, क्योंकि लापरवाही गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है।

हीटवेव आंखों को कैसे प्रभावित करती है

विशेषज्ञों के मुताबिक हीटवेव के दौरान गर्म हवाएं, शरीर में पानी की कमी और तेज धूप मिलकर आंखों की सुरक्षा परत यानी टियर फिल्म को प्रभावित करती हैं। यह टियर फिल्म आंखों को नमी देने और धूल, बैक्टीरिया तथा संक्रमण से बचाने का काम करती है। जब यह परत सूख जाती है तो आंखों में ड्राईनेस, जलन और असहजता बढ़ जाती है।

गर्मी में बढ़ा हुआ प्रदूषण और धूल भी आंखों की स्थिति को और खराब कर देता है। तेज हवाओं के कारण आंखों में छोटे कण प्रवेश करते हैं, जिससे एलर्जी और रेडनेस की समस्या बढ़ती है।

AC और तापमान में अचानक बदलाव का असर

डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी से बचने के लिए लोग अक्सर एयर कंडीशनर (AC) का अधिक उपयोग करते हैं। लगातार ठंडी और सूखी हवा में रहने के बाद जब व्यक्ति अचानक तेज धूप में बाहर निकलता है तो आंखों पर तापमान का असर और बढ़ जाता है।

AC की हवा आंखों की नमी को कम कर देती है, जिससे ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में आंखों में जलन, भारीपन और थकान महसूस होती है।

बच्चों और युवाओं पर अधिक प्रभाव

विशेषज्ञों ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में बच्चे और युवा अधिक समय मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप पर बिताते हैं। लगातार स्क्रीन देखने से पलकें कम झपकती हैं, जिससे आंखों की नमी और भी तेजी से कम हो जाती है।

इसे डिजिटल आई स्ट्रेन कहा जाता है, जिसमें आंखों में खुजली, जलन, रेडनेस और थकान जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। लंबे समय तक स्क्रीन उपयोग करने से धुंधला दिखने की समस्या भी हो सकती है।

UV किरणों का गंभीर खतरा

डॉक्टरों के अनुसार सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक सूर्य की UV किरणें सबसे अधिक तीव्र होती हैं। इस दौरान बिना सुरक्षा के धूप में रहने से आंखों को गंभीर नुकसान हो सकता है।

UV रेडिएशन के कारण निम्न समस्याएं हो सकती हैं:

मोतियाबिंद का तेजी से बढ़ना

रेटिना को नुकसान

फोटोकेराटाइटिस (आंखों का सनबर्न)

टेरीजियम जैसी गंभीर स्थिति

विशेषज्ञों ने कहा कि लंबे समय तक UV किरणों के संपर्क में रहना आंखों की स्थायी क्षति का कारण बन सकता है।

हीटवेव में आंखों को सुरक्षित कैसे रखें

डॉक्टरों ने आंखों की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

1. UV प्रोटेक्टिव सनग्लासेस पहनें

बाहर निकलते समय 100% UV सुरक्षा वाले सनग्लासेस पहनना जरूरी है।

2. शरीर और आंखों को हाइड्रेट रखें

दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी और नींबू पानी पीने से शरीर में नमी बनी रहती है, जिससे आंखों को भी राहत मिलती है।

3. 20-20-20 नियम अपनाएं

हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड तक देखें, जिससे आंखों को आराम मिलता है।

4. आंखों की सफाई पर ध्यान दें

बाहर से आने के बाद साफ और ठंडे पानी से आंखों को धोना चाहिए, लेकिन आंखों को रगड़ने से बचना चाहिए क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

5. बिना डॉक्टर सलाह के दवा न लें

आंखों में जलन या रेडनेस होने पर खुद से आई ड्रॉप का उपयोग नहीं करना चाहिए, बल्कि विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष

विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती गर्मी और हीटवेव का प्रभाव आंखों पर गंभीर हो सकता है। बदलती जीवनशैली, बढ़ता स्क्रीन टाइम और UV किरणों का संपर्क इस समस्या को और बढ़ा रहा है। ऐसे में समय पर सावधानी और सही देखभाल जरूरी है।

डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग आंखों की सुरक्षा को गंभीरता से लें और छोटे-छोटे उपाय अपनाकर बड़ी समस्याओं से बचें।

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